पॉलिटिक्स का न तो कोई पैमाना होता है और न ही कोई उसूल… पॉलिटिक्स की डिक्शनरी में एक ओल्ड थ्योरी है… थ्योरी ये कि सियासत में मुद्दों को दफनाया नहीं जाता… बल्कि लपेट कर रखा जाता है… और मौका मिलने पर उन्हीं मुद्दों को बतौर हथियार इस्तेमाल कर लिया जाता है… आज देश में जब करेंसी के मुद्दे को सियासी हवा दी गई…तो शमशीरें खिंच गईं…

































