#बैंकऑफ़बड़ौदा #राष्ट्रभाषासम्मान के तहत् लेखकों और अनुवादकों के सम्मान व पुरस्कार के लिए पांच सदस्यीय निर्णायक मंडली का गठन किया गया जिसकी अध्यक्षता प्रसिद्ध लेखिका और अंतर्राष्ट्रीय बुकर पुरस्कार विजेता गीतांजलि श्री कर रही हैं । निर्णायक मंडल के अन्य चार सदस्यों में प्रसिद्ध साहित्यकार व साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता श्री अरुण कमल, शिक्षाविद् और आहार आलोचक श्री पुष्पेश पंत, प्रसिद्ध साहित्यकार और साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता अनामिका और युवा कथाकार व अनुवादक श्री प्रभात रंजन शामिल हैं ।

‘घर पलानों छेले’ अर्थात् ‘भागा हुआ लड़का’ उपन्यास वर्ष 1953 में हुए देश में पूर्वी बंगाल के बँटवारे से जुड़ी एक दलित वर्ग के लड़के के जीवन जीने के संघर्षों की कहानी है । श्री मनोरंजन व्यापारी जी की लगभग सभी किताबें जाति, ऊंची जातियों और भेदभाव तथा सांप्रदायिकता को बढ़ावा देने के प्रयासों की कड़े शब्दों में निंदा करती हैं । इस उपन्यास की अनुवादक सुश्री अमृता बेरा का मानना है कि अनुवाद ही वो माध्यम है जिससे हम दूसरी भाषा या समाज के बारे में जान और समझ सकते हैं ।

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