‘अभिप्रेत काल’ उपन्यास के अनुवादक श्री अजय कुमार पटनायक कहते हैं कि पूरी तरह भारत का स्वर, भारत की आत्मा एक है जिसे अलग-अलग प्रांतीय भाषाओं में अभिव्यक्त किया जाता है उसे अनुवाद से जोड़ा जाना सराहनीय है.

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