आज देश के बैंकों में हमारे नागरिकों का 78,000 करोड़ रुपये बिना दावे के पड़ा है। हमें नहीं पता कि यह पैसा किसका है, यह यूँ ही पड़ा है। बीमा कंपनियों के पास 14,000 करोड़ रुपये हैं, म्यूचुअल फंड्स के पास 3,000 करोड़ रुपये हैं। डिविडेंड में 9,000 करोड़ रुपये पड़ा हुआ है। और यह सारा पैसा बिना दावे के पड़ा है।
यह पैसा गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों का है और यह सरकार यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह पैसा किसका है, क्योंकि हम इस पैसे के असली मालिक का पता लगाना चाहते हैं।
हमारी सरकार देश में इस धन के मालिको इसके मालिकों तक वापस पहुंचाने का प्रयास कर रही हैं। अब तक, इस पैसे के मालिकों की पहचान के लिए लगभग 500 जिलों में विशेष शिविर लगाए जा चुके हैं और हमने उन्हें कई हज़ार करोड़ रुपये वापस किए हैं।
साथियों, यह सिर्फ एसेट की वापसी का मामला नहीं है। यह विश्वास का मामला है। यह जनता के विश्वास को निरंतर हासिल करने की प्रतिबद्धता है। और जनता का विश्वास ही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है।
अगर गुलामी की मानसिकता होती तो सरकारी मानसिकता हावी होती और ऐसे अभियान कभी नहीं चलते।
माननीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi
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