पश्चिम बंगाल देश का इकलौता ऐसा प्रांत हैं, जहां पिछले करीब पांच दशक से राजनीतिक विरोध के चलते खून बहाने का सिलसिला आज भी रुका नहीं है. पहले वामपंथी सरकारों को इस हिंसा के लिए कसूरवार ठहराया जाता था, लेकिन जमीनी राजनीति को बिछाने से लेकर उसे ओढ़ते हुए अपनी अलग पहचान बनाने वाली ममता बनर्जी के राज में भी सियासी रंजिश से पैदा होने वाली इन हत्याओं का क्रम थमने का नाम नहीं ले रहा है. बंगाल के बीरभूम जिले के बोगतुई गांव में हुई हिंसा और आगजनी में 8 लोगों के मारे जाने का सच तो जांच के बाद ही सामने आएगा. लेकिन लोकतंत्र के इतिहास में शायद ये पहली ऐसी घटना होगी, जबकि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने इसे लेकर राज्य सरकार की इतने तीखे शब्दों में मजम्मत करते हुए ये कहा है कि पश्चिम बंगाल जंगलराज के हवाले है.





























