कार्तिक मास में मनाये जाने वाले दशहरा समारोहों में देश भर में बुराई के प्रतीक राक्षस परिवारों के पुतलों का दहन किया जाता है। लेकिन कुमाऊँ के सांस्कृतिक केन्द्र अल्मोड़ा में मनाया जाने वाला दशहरा महोत्सव रामकथा के रसिकों को कल्पना के आलोक की सैर करवा देता है मानों इन पात्रों की जीवन यात्रा उनके सम्मुख ही घट रही हो । दशहरे के दिन रंग-बिरंगे पुतलों के सम्मुख खड़ा दर्शक अपने को वर्तमान से कहीं दूर अतीत में घटनाचक्र के नजदीक पाता है।

































